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कविताएँ

माँ को नही मिटनें देंगें

गिरा देगें शत्रु को नीचे, चाहे छुपा हो नभ से ऊँचे नहीं डरेगें तोपों और व्यर्थ गोली की बौछारों से नहीं डरेगें भूखी, नंगी, पाखंडी सरकारों से अखण्ड भारत का सपना हम पूरा कर दिखला देगें जितना ऊँचा जाएगा तू, उतनी ऊँची कब्र बना देगें ।

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इस कक्ष की दूसरी कृतिया

 मिट्टी और सोना
 आओ फिर से दिया जलाएं
 मानव को है शिकायत
 सांस्कृतिक दूत
 ब्रैडफर्ड आन एवन
 पल पल तेरे "ईश्वर के" ख्यालो में