<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?>
<!-- generator="wordpress/2.0.4" -->
<rss version="2.0" 
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	>

<channel>
	<title>चौपाल</title>
	<link>http://hindi.1bharat.com/duniya</link>
	<description>We speak your language, feel free, speak</description>
	<pubDate>Mon, 01 Mar 2010 19:27:35 +0000</pubDate>
	<generator>http://wordpress.org/?v=2.0.4</generator>
	<language>en</language>
			<item>
		<title>अखिल अमेरिकीय हास्य कवि सम्मेलन</title>
		<link>http://hindi.1bharat.com/duniya/?p=7</link>
		<comments>http://hindi.1bharat.com/duniya/?p=7#comments</comments>
		<pubDate>Tue, 21 Nov 2006 19:54:20 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Bhupen Maurya</dc:creator>
		
	<category>हिन्दी</category>
		<guid isPermaLink="false">http://hindi.1bharat.com/duniya/?p=7</guid>
		<description><![CDATA[पिछले रविवार ( १९ नवम्बर २००६) को हमने हिन्दी यू.एस.ए. द्वारा अयोजित कवि सम्मेलन देखा &#124; बहुत दिनो बाद हिन्दी मे इतना अच्छा कार्यक्रम देखाँ.
हम भारतीय, जो अमेरिका मे है को हमेशा समय का अभाव ही रहता है लेकिन हिन्दी का यह कार्यक्रम शायद सबसे महत्वपूर्ण था , जो लोग इसे नही देख पाये शायद मै आशनी [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>पिछले रविवार ( १९ नवम्बर २००६) को हमने <a href="http://hindiusa.org">हिन्दी यू.एस.ए.</a> द्वारा अयोजित कवि सम्मेलन देखा | बहुत दिनो बाद हिन्दी मे इतना अच्छा कार्यक्रम देखाँ.</p>
<p>हम भारतीय, जो अमेरिका मे है को हमेशा समय का अभाव ही रहता है लेकिन हिन्दी का यह कार्यक्रम शायद सबसे महत्वपूर्ण था , जो लोग इसे नही देख पाये शायद मै आशनी से बता नही सकता कि उन्होने क्या खोया | एक आशा की किरण .. एक बीते दिनो की याद .. कुछ गुदगुदी .. कुछ ठहाके .. ओर बहुत अरसो के बाद अपनो के साथ एक शाम |</p>
<p>हम लोग हर रविवार को पूज्य पाडूरँग शास्त्री प्रेणित स्वाध्याय के प्रवचन सुनने जाते है | इस रविवार को प्रवचन के बाद भगवद्ग़ीता की जयन्ती के लिये गीता के श्लोको के बाद  बच्चो ने श्री कृष्ण या अर्जुन के बचपन की कहानिया प्रस्तुत किया | उस कार्यक्रम के बीच से उठकर आने मे थोडी ग्लानि हुई, लेकिन ईश्वर का दिल बडा है वह हमे जरुर माफ कर देगा हमारी साँय प्रार्थना सुनकर |</p>
<p>बहरहाल किसी तरह हम अपने परिवार के साथ निकले लेकिन फिर पाया कि वहा का पता तो सिर्फ वाँईस मेल मे ही है , उपर से रटगर्स का परिन्गड भी दो नगरो ओर रैरिटन नदी के किनारो पर बिखारा पडा है | पहले हम पिसकाटवये की ओर चले फिर से वाय्स मेल सुना तो लगा नही यह तो न्यु ब्रनस्वीक का क्षेत्र है | फिर जब १८ से कामर्सियल की ओर गये तो सडक का काम चालू होने से बाहर जाने का रास्ता चला गया, कोई बात नही युटर्न मारा तो सीधा रास्ता सामने था, यही नही हिन्दी <u><font color="#0000ff">यू.एस.ए.</font></u> के कार्यकर्ताओ ने प्यारी - २ हिन्दी मे लिखी दिशा पटिकाए भी लगा रखी थी | शायद यह छोटी - २ चीजे की कमी हमे यहा कुछ ज्यादा महसूस होती है |</p>
<p>हम पहुचे तो मन्च पर हमारे भारतीय दूतावास के प्रतिनिधि थे | उनके समर्थन के आश्वाशन से खुशी हुई लेकिन कार्य तो हमे ही करना होगा | उसके बाद उपेन्द्र शिवकुला जी आये, उनका एक मद्रासी होकर भी हिन्दी मे बोलना अच्छा लगा | सबसे ज्यादा गर्व तो उन तमाम कार्यकर्ताओ को देखकर हुवा जो अपना खुद का वित्त खर्च कर कर हिन्दी शिखाने का काम बरसो से कर रहे है |</p>
<p>बाद मे श्रीमती विन्देशवरी जी मन्च पर आयी , उनकी कविताये आम भारतीय; जो अमेरिका मे है , के लिए एकदम सटीक थी | हर कोई यहा पैसा कमाने आता है और ज्यादातर लोग यहा की धन की चकाचौध मे खो जाते है ,शायद भाषा और सन्स्कृति को प्रेम करने वाले लोगो के अलावा | उन लोगो के लिये मेरी एक सलाह है कि बन्जारो का इतिहास देख लो ,युरोप के जिप्सीयो का जीवन आगे चलकर अगर नही जीना है तो चेतो, जागो और हिन्दी , हिन्दु और हिन्दुस्तान के कृतज्ञ रहो | विन्देशवरी जी की कविताये इतनी सरल थी कि मेरे बच्चे जो अमेरिका मे बडे हुये है भी समझ रहे थे |</p>
<p>अभिनव जी कवितावो का क्या कहना , न सिर्फ साहित्यीक दृष्टि से बल्कि उनके पीछे के विचारो का सम्पूर्णता थी | उन्होने ने हमे गुदगुदाया, हँसाया, रूलाया और याद दिलायी उन बीते हुये बरसो की जब हम इस विदेश की भागदौड से दूर स्वतन्त्र पक्षी की तरह जहा मन भाया वहा गये, जो मन भाया वह किया|</p>
<p>देवेन्द्र जी की कवितावो ने हमे झँझोरा उस सुप्तावस्था से जिसमे अमेरिका मे रहने वाले ज्यादातर भारतीय रहते है | जिनका सपना एक और डन्किन डोनट या लान्डरोमैट खोलने तक रह जाता है|</p>
<p>मेरी धर्मपत्नी ने शायद अपना अनुभव एक वाक्य मे बहुत अच्छे से कहा &#8221; बरसो मे पहली बार मै इतना हँसी हूँ &#8221; | मै भी सोचता हू कि यह एक बहुत ही अच्छा कार्यक्रम था और काश हमने पूरा देखा होता | उससे भी बढकर अच्छा यह होता की काश हमारे देश के सारे वो लोग हमारे साथ होते जिन्हे अपनी भाषा और सँस्कृति से शायद उतना ही प्यार है लेकिन वो इस मायानगरी मे खो गये है |</p>
<p>सँस्कृति या भाषा का काम बिना किसी फल की कामना के बिना करना आशान नही है,यह निरन्तर साधना है | यह गीता का सबसे महत्वपुर्ण सन्देश है | इसी लगाव की कमी के कारण है सोफ्टवेर मे अग्रित भारत देश कि मातृभाषा का कम्पूटर के रोजाना कामो मे नगण्य उपयोग हो रहा है | इस सन्दर्भ मे हम देखेगे तो अन्दाजा होगा कि श्री देवेन्द्र जी और उनके कार्यकर्ताओ द्वारा हिन्दी उ.स.ए. का कार्य कितना सराहनीय है |</p>
<p> 
</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRSS>http://hindi.1bharat.com/duniya/?feed=rss2&amp;p=7</wfw:commentRSS>
		</item>
		<item>
		<title>बाबा रामदेव के प्राणायाम और योगासन</title>
		<link>http://hindi.1bharat.com/duniya/?p=6</link>
		<comments>http://hindi.1bharat.com/duniya/?p=6#comments</comments>
		<pubDate>Wed, 08 Nov 2006 21:36:01 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Bhupen Maurya</dc:creator>
		
	<category>स्वास्थ्य</category>
		<guid isPermaLink="false">http://hindi.1bharat.com/duniya/?p=6</guid>
		<description><![CDATA[पिछले कुछ सालों से भारत में बाबा रामदेव के प्राणायाम और योगासनो ने एक लहर सी चला रखी है। क्यों न चले जब इससे असाध्य रोगो में लोगों को फायदा हो रहा हो. कैन्सर,मधुमेह, ब्लड प्रेशर, बढा वजन और ढेड सारी बिमारिया जिसका आपने शायद नाम भी न सुना होगा, मे लोगो को इससे लाभ [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>पिछले कुछ सालों से भारत में बाबा रामदेव के प्राणायाम और योगासनो ने एक लहर सी चला रखी है। क्यों न चले जब इससे असाध्य रोगो में लोगों को फायदा हो रहा हो. कैन्सर,मधुमेह, ब्लड प्रेशर, बढा वजन और ढेड सारी बिमारिया जिसका आपने शायद नाम भी न सुना होगा, मे लोगो को इससे लाभ हो रहा है.</p>
<p>दूसरी सब से बडी बात जो हमने देखी है कि बाबा के प्राणायाम बहुत ही आसान है. मुख्यत: कपालभाति और अनुलोम-विलोम तो बहुत ही आसान और जल्द ही असर दिखाने वाले है. बाबा के सात प्राणायाम ,सात सूक्ष्म व्यायाम और सात आसन जो अति सरल है करने मे करीब १ घन्टा समय लगता है. आइये देखते है इनकी विधि:</p>
<p>१. भास्त्रिका<br />
लम्बी गहरी साँस ले और बाहर छोडे. करीब २-५ मिनट तक इसे करे. इससे आपको निम्न अन्गो/बिमरियो मे लाभ होगा:<br />
दिल , फेफडो , दिमाग , माइग्रेन , लकवा , स्नायु सम्बन्धित और आपकी आभा बढेगी.</p>
<p>२. कपालभाति<br />
हवा जोर लगाकर बाहर फेँके(पेट अन्दर जायेगा). दिल की बिमारी या कमजोर लोग धीरे धीरे करे.<br />
३० बार/१ मिनट से शुरु करके, ५ मिनट और ज्यादा बिमारी हो तो १५-२० मिनट तक कर सकते है.<br />
इससे मोटापा, पेट की तमाम बिमारिया (कब्ज,एसिडिटी आदि), गुर्दा, मधुमेह , सोते समय नाक बजना, और कैँसर, अस्थमा, कोलेस्ट्रोल और चेहरे का ओज-तेज .</p>
<p>३. बाह्य<br />
ठुडी को गले से लगा दे, पेट के नीचे बन्द लगा दे और साँस बाहर छोडकर पेट को अन्दर रीढ की हड्डी से चिपका दे, थोडी देर साँस बाहर छोडकर रखे.<br />
इसे २-५ बार करे. इस प्राणायाम से कपालभाति से मिलने वारे सारे फायदे होते है, दूसरे शब्दो मे यह कपालभाति का पूर्णक है.</p>
<p>४. अग्निशार<br />
ठुडी को गले से लगा दे, पेट के नीचे बन्द लगा दे और साँस बाहर छोडकर पेट को एक लहर की तरह रीढ की हड्डी के पास तक ले ज़ाये.<br />
इसे २-५ बार करे.</p>
<p>५. अनुलोम-विलोम<br />
> दाई नाक अगुँठे से बन्द करे, बाई से लम्बी साँस ले.<br />
> अब दाई नाक खोले और बाई नाक को मध्य अँगुली से बन्द करे, और दाई नाक से साँस बाहर छोडे.<br />
> अब दाई नाक से साँस अन्दर ले.<br />
> अब दाई नाक अगुँठे से बन्द करे, बाई से साँस बाहर छोडे.<br />
इसी तरह यह क्रिया १०-२० मिनट तक करे. ध्यान रहे फेफडो मे हवा भरे, पेट मे नही.<br />
इस प्राणायाम से दिल,धमनियो की रुकावट (ब्लड प्रेशर), जोडो का दर्द दिमाग , माइग्रेन , लकवा , स्नायु सम्बन्धित,अस्थमा, एलर्जी आदि मे लाभ होता है.</p>
<p>६. भ्रमरी<br />
कानों को अँगुठो से बन्द करे, माथे पर पहली उँगली रखे, बाकि तीन नाक के बगल आँख के नीचे रखे. लम्बी साँस ले और भौरे की तरह भनभनाते हुये नाक से साँस बाहर छोडे.<br />
इसे २-५ मिनट तक करे. इस प्राणायाम से हाइपर टेन्सन, ब्लड प्रेशर, लकवा , माइग्रेन और ध्यान न लगने आदि मे लाभ होता है.</p>
<p>७. उदगीत<br />
नाक से लम्बी साँस ले और ॐ का उच्चारण करे.</p>
<p><strong>टिप्पणी: यह वेबसाइट उपचार के लिए नही है, कृपया यहाँ प्रश्न न पूछें, आपको कोई उत्तर नही मिलने वाला है</strong>
</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRSS>http://hindi.1bharat.com/duniya/?feed=rss2&amp;p=6</wfw:commentRSS>
		</item>
		<item>
		<title>चौपाल मे स्वागतम्</title>
		<link>http://hindi.1bharat.com/duniya/?p=5</link>
		<comments>http://hindi.1bharat.com/duniya/?p=5#comments</comments>
		<pubDate>Wed, 08 Nov 2006 02:30:54 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Bhupen Maurya</dc:creator>
		
	<category>साधारण</category>
		<guid isPermaLink="false">http://hindi.1bharat.com/duniya/?p=5</guid>
		<description><![CDATA[चौपाल मे आपका वापस स्वागत है. आपकी प्रतिक्षा के लिए धन्यवाद्. पिछले कुछ दिनो मे हमने अपनी साइट को एक अच्छे सर्वर पर होस्ट की है. आशा है आपको साइट तक पहुचने मे आसानी होगी.
 
आपने और भी बदलाव देखे होगे जैसे:
१. सारी साइट उनिकोण मे है, जिससे आपको फान्ट की समस्या नही होनी चाहिये.
२. खोजोमे [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>चौपाल मे आपका वापस स्वागत है. आपकी प्रतिक्षा के लिए धन्यवाद्. पिछले कुछ दिनो मे हमने अपनी साइट को एक अच्छे सर्वर पर होस्ट की है. आशा है आपको साइट तक पहुचने मे आसानी होगी.</p>
<p> </p>
<p>आपने और भी बदलाव देखे होगे जैसे:<br />
१. सारी साइट उनिकोण मे है, जिससे आपको फान्ट की समस्या नही होनी चाहिये.<br />
२. खोजोमे आसनी होगी.<br />
३. हमारा नया समाचार का पन्ना अब हर घन्टे अपडेट होता है.</p>
<p>अपने सुझाव और रचनाये हमे भेजे.</p>
<p>धन्यवाद
</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRSS>http://hindi.1bharat.com/duniya/?feed=rss2&amp;p=5</wfw:commentRSS>
		</item>
	</channel>
</rss>
